Tuesday, June 30, 2009

आज तीस जून है



आज तीस जून है ...

तीन साल पूरे हो गए हैं एक घटना को ...पर जो अब भी ताजा है

वक्त को गुजरना है लम्हों को सहना है और दिल को तड़पना है ...

वो खुश होंगे .आज उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी उपाधि मिलने की पूर्व पीठिका बननी है ..फिर उपाधि मिलना औपचारिकता मात्र होगी ..खुश हूँ मैं..लाजिम है ...

दिन , अगर ऊपर वाला है तो वो ही तय करता है ..कब क्या होना है ..

मैं तो चाहता था.आज इस शहर में ना होऊं..पर फिर भी रह गया...शायद दिमाग मुझे कहीं ले जाना चाहता था और दिल रोकना....रुक गया हूँ.. ..

4 comments:

sulekha pradhan said...

a deep line of sorrow can be felt thru your words.

Anonymous said...

wow ! what a expression,but with heart breaking 'DARD'.Its life Dushyant!

Harkirat Haqeer said...

शब्दों में कुछ खोने का एहसास ......कुछ गिला .....कुछ रंजिश.....और कुछ दर्द ......कुछ तो बात है .....!!!!!!

M.A.Sharma "सेहर" said...

hmmmm its always good to come clear


try u will feel better :)

Cheers !!